(18) ज़रा सुन लो हम अपने प्यार का अफसाना कहते हैं।
पंकज खन्ना 9424810575 रेल संगीत-परिचय : ब्लॉग सीरीज को अच्छे से जानने के लिए। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में और गाने क्यों देखें या सुनें!? रेल संगीत पर अब तक लिखे गए लेख क्रमानुसार। ज़रा सुन लो हम अपने प्यार का अफसाना कहते हैं। गाना: ज़रा सुन लो हम अपने प्यार का अफसाना कहते हैं। फिल्म: बाजार (1949) । गीतकार: कमर जलालाबादी। संगीतकार: श्याम सुंदर और हुस्नलाल-भगतराम। गायिका: राजकुमारी, लता मंगेशकर और साथी।(निगार सुलताना, कुक्कू और साथियों पर फिल्माया गया गाना)। ये गाना या कव्वाली एक रेलगीत भी है। निगार सुलताना और उनकी महिला नाटक मंडली (थिएटर ग्रुप) इस कव्वाली को गा रहे हैं। पुरुष साजिंदे छुपा दिए गए हैं।और ये कव्वाली बन जाती है All Female कव्वाली! सामान्यतः कव्वालियां सूफियाना होती हैं। लेकिन फिल्मी कव्वालियों में आम तौर पर दो ग्रुप होते हैं एक पुरुषों का और दूसरा महिलाओं का। दोनों तरफ से एक दूसरे पर प्यार/व्यंग्य/दर्द भरे शब्द बाण छोड़े जाते हैं। कव्वाल और दर्शक/श्रोता इन कव्वालियों का भरपूर आनंद लेते हैं। आज की कव्वाली प्रसि...