(22) धक धक करती चली जीवन की रेल रे!
पंकज खन्ना 9424810575 रेल संगीत-परिचय : ब्लॉग सीरीज को अच्छे से जानने के लिए। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में और गाने क्यों देखें या सुनें!? रेल संगीत पर अब तक लिखे गए लेख क्रमानुसार। ये गीत ( धक धक करती चली जीवन की रेल रे !) पिछले रेलगीतों से थोड़ा अलग है। फिल्म दिलरुबा (1950) से है। फिल्म के शुरू में हीरोइन रेहाना का नाम सबसे पहले लिखा हुआ दिखाई देता है और फिर नाम आता है फिल्म के हीरो देवानंद का। उस दौर में फिल्म अभिनेत्री का नाम हीरो से पहले लिखा जाना रेहाना का जलवा दर्शाता है। इस गाने में भी धक-धक करते भाप के इंजिन की, सीटी की मधुर ध्वनि के साथ, ग्रैंड एंट्री होती है। रेल के डब्बों का भी लॉन्ग शॉट दिखाया जाता है। और फिर रेल के डिब्बे के अंदर का गीत। गीत के बीच में ट्रेन के बाहर के सुन्दर शॉट भी दिखाए जाते हैं। एक पुल के ऊपर से गुजरती हुई रेल सुंदर दिखाई देती है। आप स्वयं देख ही लेंगे। इस गीत में एक ड्रामा कंपनी रेल में सफर कर रही है। बॉम्बे से किसी 'संतोष नगर' की तरफ। कंपनी के कलाकार ट्रेन में नृत्य और गीत की रिहर्सल शुरू क...