(11) जान बची सो लाखों पाए (1943)
पंकज खन्ना 9424810575 रेल संगीत-परिचय : ब्लॉग सीरीज को अच्छे से जानने के लिए। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में और गाने क्यों देखें या सुनें!? रेल संगीत पर अब तक लिखे गए लेख क्रमानुसार। जान बची सो लाखों पाए गाने के बोल हैं: जान बची सो लाखों पाए! फिल्म का नाम संजोग (1943)। गायक: श्याम कुमार। गीतकार: डी एन मधोक। संगीत : नौशाद। सबसे पहले तो आज का गाना जान बची सो लाखों पाए देख -सुन लीजिए। गीत के शुरुआत में स्टीम इंजन के चमचमाते लोहे के पहिए, क्रैंक, कनेक्टिंग रोड, पिस्टन और क्रॉसहेड दिखाई देते है। इंजिन को पूर्ण रूप से नहीं दिखाया गया है। लेकिन जितना दिखाया है वो भी कम नहीं है किसी भी सच्चे रेल प्रेमी/Ferroequinophile* के लिए। 'नौजवान' संगीतकार नौशाद (1919- 2006) ने गाने का अंत स्टीम इंजन की मधुर सीटी के कर्णप्रीय संगीत सृजन से किया है। स्टीम इंजन के दर्शन कराने के कुछ ही क्षणों के बाद कैमरा सीधे एक बोगी पर केंद्रित हो जाता है। अब पूरा कैमरा इसी बो...