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(10) हम चले वतन की ओर (1943)

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पंकज खन्ना  9424810575   रेल संगीत-परिचय : ब्लॉग सीरीज को अच्छे से जानने के लिए। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में और गाने क्यों देखें या सुनें!? रेल संगीत पर अब तक लिखे गए लेख क्रमानुसार।                  हम चले वतन की ओर गाना:  हम चले वतन की ओर । फिल्म: काशीनाथ (1943) गायक: असित बरन। गीतकार: पंडित भूषण। संगीतकार: पंकज मलिक। (असित बरन पर ही फिल्माया गया गीत।) आज का गीत-संगीत, रेल संगीत के पहले आलेख  आई बहार आई बहार की थोड़ी सी याद दिलाता है। जैसे पहले गीत में पंकज मलिक ट्रेन के डब्बे के दरवाज़े पर खड़े होकर गाते हैं वैसे ही इस गाने में असित बरन कभी खिड़की कभी दरवाजे पर खड़े होकर मस्ती से गा रहे हैं:  हम चले वतन की ओर । दोनो ही गानों में पंकज मलिक का संगीत है। पंकज मलिक बहुत बड़े गायक भी थे पर उन्होंने उनके संगीत में अन्य गायकों को गाने का भरपूर मौका दिया। पंकज मलिक इस गाने को भी आसानी से गा सकते थे। लेकिन उन्होंने इसे गायक अभिनेता असित बरन से गवाया।               ...

(2) चले पवन की चाल (1941).....( फूल न हो पामाल)

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पंकज खन्ना  9424810575 रेल संगीत-परिचय : ब्लॉग सीरीज को अच्छे से जानने के लिए। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में और गाने क्यों देखें या सुनें!? रेल संगीत पर अब तक लिखे गए लेख क्रमानुसार।                                 चले पवन की चाल इसे कविवर प्रदीप ने लिखा है। बाकी सारे रोल (अभिनेता, गायक और संगीतकार) निभाए हैं दादा साहेब फालके अवार्ड से सम्मानित पद्मश्री पंकज मलिक ने। और फिल्म वही है पिछले सप्ताह वाली: डॉक्टर (1941)। ये गाना इसी फिल्म के पहले वाले गाने ' आई बहार ' से काफी अलग है। पहले गाने में मौज मस्ती थी। इस गाने में काफी गंभीरता है जो उच्च कोटि के गीत-संगीत में कहीं खो जाती है। पहले गाने में पंकज मलिक रेल के अंदर थे और बैलगाड़ी आदि बाहर। इस गाने में पंकज मलिक घोड़ा-गाड़ी को  छोटी लाइन ( Narrow Gauge) की रेल पटरी के समानांतर दौड़ा रहे हैं। पीछे से पुराने स्टीम इंजिन वाली रेलगाड़ी उन्हें ओवरटेक करती है। ( इंजिन या डब्बों पर लिखे शब्द/नम्बर ठीक से पढ़ते नहीं बन रहे हैं। फिर भी पटरियों और डब्ब...

(1) आई बहार आज आई बहार (1941)

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पंकज खन्ना  9424810575 रेल संगीत-परिचय : ब्लॉग सीरीज को अच्छे से जानने के लिए। ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में और गाने क्यों देखें या सुनें!? रेल संगीत पर अब तक लिखे गए लेख क्रमानुसार।                           आई बहार आज आई बहार  संभवतः हिंदी फिल्मों में रेल पर फिल्माया गया पहला गाना ये  है : आई बहार आज आई बहा र! फिल्म का नाम है डॉक्टर । सन 1941 में रिलीज हुई थी। गीतकार हैं आरजू लखनवी। अभिनेता, गायक और संगीतकार हैं पंकज मलिक। पहले गाने के बोल पढ़ लेते हैं और एक बार गाना देख-सुन भी लें इस लिंक से। आई बहार आज आई बहार-2 गुलशन में ,   गुलशन में लिये फूलों के हार आई बहार आज आई बहार मेरे दिल में भी ताज़ा उमंगें बढ़ीं -२ आरजुएं  बढ़ी और कैसी बढ़ीं लिये फूलों के हार,  आई बहार आज आई बहार-2 मस्ती से डाली जो यूँ झूम उठीं इस मस्त से इनकी आँखें लड़ीं ) -२ आज हर फूल पर ,  आज हर फूल पर है नई ताज़गी रंग चोखा अनोखा है ख़ुश्बू नई अन्दलीबें पुकारीं ज्यूँ ही ये सुना लिये फूलों के हार ,  आई बहार आज आई बहार आज फू...