क्यों देखें या सुने ब्लैक एंड व्हाइट गाने?




                              (सांकेतिक फोटो)

ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों और गानों से लोग दूर भागते हैं। नौजवान पीढ़ी में अपवादों को छोड़कर कोई भी इतने पुराने गानों या फिल्मों या स्टीम इंजन वाली रेलों को पसंद नहीं करता। और तो और हमारी पीढ़ी के भी कई लोग ये सब झेल नहीं पाते हैं।

सफेद-काली फिल्में या गाने न देखने-सुनने के पीछे उनका उत्तर बड़ा आसान होता है! दोयम दरजे की रिकॉर्डिंग, रंगों, तकनीक, संसाधनों का अभाव, अपरिचित कलाकार, धीमा संगीत, कभी-कभी अस्पष्ट संगीत, पूरे कपड़े पहने हीरोइन, बचकाना हास्य आदि। और एक बात जो कुछ लोग बोलते नहीं हैं पर हम समझ सकते हैं:  इस शौक से रईसी कैसे झाड़ें!? 

और बहुत सारे लोग पूछ बैठते हैं कि क्यों देखें सफेद काले गाने जब रंगीन विकल्प उपलब्ध है? इस लेख में इसका उत्तर देने की ईमानदार कोशिश की है। पहले कुछ कारण गिनाते हैं:

(1) कलाप्रेम: ये गाने और फिल्में हमारी धरोहर हैं। अपने समय की सबसे अच्छी कलाकृतियां हैं। इस कला से ही सीखकर अब बेहतरीन फिल्में बन पाती हैं। इस कला को समझें और सराहें। कलाकार न सही पर कलाप्रेमी तो बन ही सकते हैं। सिर्फ पेरिस में जाकर महंगे लूवर म्यूजियम में  मोनालिसा की तस्वीर देखना कलाप्रेम नहीं होता है। कभी ध्यान लगाइए इन पुरानी तस्वीरों पर और रेलगाड़ियों पर...!

(2) प्रेरणा: ये  हमें सादगी और सच्चाई से जीने की प्रेरणा देती हैं। कोई रंगबाजी नहीं! सब कुछ ब्लैक एंड व्हाइट में!

(3) ग्लैमर और स्वप्नलोक की यात्रा : इन फिल्मों का ग्लैमर कोशेंट ( Glamour Quotient) बहुत  अधिक होता था। हीरो-हीरोइन सादे कपड़ों में कम संगीत उपकरणों से उत्पन्न कर्णप्रिय संगीत के बीच में सिर्फ अपनी भाव भंगिमा से जो प्रभाव उत्पन्न करते थे वो अब अत्यधिक मसालों के बीच उत्पन्न नहीं हो पाता है। यही कारण है कि ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में जो सपनो की दुनिया या मायावी संसार रचती हैं वो कलर फिल्में अक्सर नहीं कर पाती हैं।

(4) संगीत चिकित्सा: आज की दौड़ भाग वाली जिंदगी से उत्पन्न हुई पीढ़ा को मलहम  लगाते हैं ये ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों के गाने। क्योंकि इन ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों में संगीत का पहलू बहुत कर्ण प्रिय और मजबूत होता था। आज भी जब सर्वकालिक महान गानों के फेहरिस्त बनाई जाती  है तो ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों  के अमर गाने ऊपर ही दिखाई पड़ते हैं।

संगीत की कोई उम्र नहीं होती! रोज दो चार पुराने, बहुत पुराने, गाने सुनिए। दिल और दिमाग को सुकून मिलेगा। बस यही  संगीत चिकित्सा है!

(5) सस्ता और मधुर शौक: अब रिटायर्ड हैं। जेब में पैसा है लेकिन बचाकर रखना चाहते हैं। कल पता नहीं क्या समस्या खड़ी हो जाए। किसके आगे हाथ फैलाएंगे? और बच्चों के लिए भी तो छोड़ना है। हर साल महंगी विदेश यात्राएं नहीं कर सकते। ठीक है, बात समझ में आती है। लेकिन इस ब्लैक एंड व्हाइट के शौक पालने में कुछ खर्चा ही नहीं है! फिल्म देखना शुरू करो और पुराने दौर में पहुंच जाओ! एक प्रकार से ये दिमागी या मानसिक घुमक्कड़ी है! मजे ही मजे!

आजकल बहुत सारे पर्यटन व्यापारी शहरों से दूर  ग्रामीण, जंगली या पहाड़ी इलाकों में पुराने मिट्टी वाले मकानों में बिना आधुनिक सुविधा वाली प्रॉपर्टी में लोगो को अत्यधिक महंगे दामों में पुराने जमाने का अनुभव कराते हैं। पैसे देकर वो अनुभव लेना आपकी इच्छा है। 

लेकिन इस ब्लैक एंड व्हाइट के पुराने जमाने के अनुभव को आप रोज ले सकते हैं बिना कुछ पैसा खर्च किए!

(6) दिमागी कसरत: इन फिल्मों की भाषा, वेशभूषा और पात्रों  को समझने में कई बार दिमाग लगाना पड़ता है। बुढा रहे दोस्तों, कई बार तो ये फिल्में और फिल्मी गाने किसी पहेली की तरह सामने आ धमकते हैं। इन पहेलियों को देखो, समझो और सुलझाओ! दिमाग चलेगा। Alzeimer नाम की बीमारी से दूरी बढ़ेगी। बौद्धिक संतोष (Intellectual Satisfaction) मिलेगा, वो अलग!

(7) अगला फैशन: हमें पूरा यकीन है जल्द ही पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट फिल्में देखने का शौक पैदा होगा। बड़ी हस्तियां इन अनमोल हीरो को पहचानेंगी और फिर बाकी सब लोग भी उनका अनुसरण करेंगे। आप पहले से ही ये सस्ता शौक पाल लें:)

ऊपर लिखे कारण तो हैं ही। और  एक व्यक्तिगत कारण भी है। थोड़ी  सी अंदर की बात है। लेकिन आप इतनी जिद कर रहे हो तो बता ही देता हूं!

Diebetologist  बोलते हैं समझो जरा शक्कर का चक्कर। कार्डियोलॉजिस्ट कहते हैं नमक से चमक। बड़े -बूढ़े कहते हैं मत खा तला भुना, नुकसान होगा कई गुना। न्यूट्रिशनिस्ट बीवी कहती है शाम 7 बजे के बाद कुछ नहीं मिलेगा। बोल! 

मित्रों से कहो डिनर नहीं लंच पार्टी करते हैं तो बोलते हैं भग...! पुराने रंगीन गाने देखो तो बेटा कहता है इस उमर में हेलन के डांस देखते हो, शर्म नहीं आती!? ज्यादा लंबी साइकिल राइड कर लो तो परिजन ऐसे देखते हैं जैसे खा ही जायेंगे! दोस्तों को बोलो कि चलो होल्डॉल लेकर रेल यात्रा करेंगे तो बोलते हैं सठिया गया है!? रिटायर्ड बंदा करे तो क्या करे? कुछ भी करो लोगबाग रोकेंगे ही, टोकेंगे ही!

अब ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों के गाने* अपनी इच्छा से धीमी आवाज में देखता और सुनता हूं। कभी कभार ग्रामोफोन और रिकॉर्ड प्लेयर पर भी सुन लेता हूं।Trekking, Walking, Cycling के बाद बचे समय में डूबे रहो तवा संगीत में या रेल संगीत में! कोई डॉक्टर, परिजन या माइका लाल इसके विरुद्ध  बोलता ही नहीं है! किसी को आपत्ति नहीं है इसमें। सूम में कोने में  बैठकर देखो, सुनो अपने पसंद के ब्लैक एंड व्हाइट गाने, बगैर किसी रोकटोक के! और फिर लिख के यहां पोस्ट कर दो। 

दिल में बसे याराने तराने बहुत हैं। अभी लिखने के बहाने सुहाने बहुत हैं। हम तो लिखेंगे भिया!


पंकज खन्ना
9424810575

मेरे कुछ अन्य ब्लॉग:

हिन्दी में:
तवा संगीत : ग्रामोफोन का संगीत और कुछ किस्सागोई।
ईक्षक इंदौरी: इंदौर के पर्यटक स्थल। (लेखन जारी है।)

अंग्रेजी में:
Love Thy Numbers : गणित में रुचि रखने वालों के लिए।
Epeolatry: अंग्रेजी भाषा में रुचि रखने वालों के लिए।
CAT-a-LOG: CAT-IIM कोचिंग।छात्र और पालक सभी पढ़ें।
Corruption in Oil Companies: HPCL के बारे में जहां 1984 से 2007 तक काम किया।

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*अगर आप भी ब्लैक एंड व्हाइट गाने देखना-सुनना शुरू करना चाहते हैं तो नीचे दिए गए लिंक्स से ये नया शौक शुरू कर सकते हैं:

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